बहराइच में बेसिक शिक्षा विभाग की 13 हजार से अधिक सरकारी पुस्तकें बेची गईं, अनुचर समेत 4 गिरफ्तार

The Awadh Voice | विशेष रिपोर्ट

बहराइच।

अवध क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बहराइच जिले के रामगांव क्षेत्र में सरकारी स्कूलों के लिए आई 13,000 से अधिक पाठ्यपुस्तकों को कथित रूप से कबाड़ी को बेच दिया गया। मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें बेसिक शिक्षा विभाग का एक अनुचर (चपरासी) भी शामिल है।

यह घटना न केवल विभागीय लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि सरकारी तंत्र की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।

कैसे सामने आया घोटाला?

सूत्रों के अनुसार, विद्यालयों में वितरण के लिए आई किताबें गोदाम से संदिग्ध परिस्थितियों में गायब हो रही थीं। इसी बीच स्थानीय स्तर पर कबाड़ी की दुकान पर बड़ी संख्या में नई, अप्रयुक्त सरकारी किताबें मिलने की सूचना मिली।

पुलिस ने मौके पर छापेमारी कर हजारों किताबें बरामद कीं। जांच में सामने आया कि ये पुस्तकें सरकारी विद्यालयों के लिए भेजी गई थीं। इसके बाद संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपी कौन?

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में:

विभाग का एक अनुचर

कबाड़ी

दो अन्य सहयोगी

शामिल हैं। पूछताछ में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस मामले में और कर्मचारी या अधिकारी भी शामिल हैं।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

जिला प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। मामला उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की स्थिति को लेकर भी चर्चा में है।

The Awadh Voice की पड़ताल

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं। उनके लिए मुफ्त किताबें शिक्षा का आधार होती हैं। ऐसे में किताबों का कबाड़ में मिलना सिर्फ आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय भी है।

सवाल यह है:

क्या यह सिर्फ चार लोगों की करतूत है?

या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था?

गोदाम से किताबें बाहर कैसे निकलीं?

The Awadh Voice इस मामले की आगे की हर अपडेट पर नजर बनाए हुए है।

एक टिप्पणी भेजें

और नया पुराने