शनिवार को जब हम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुस्तफाबाद जरवल पहुंचे, तो वहां की स्थिति देखकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए। विशेष रूप से लेबर रूम से जुड़े वार्ड में जो दृश्य देखने को मिला, वह किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को परेशान कर सकता है।
गंदे और बदहाल मिले बेड
अस्पताल के जिस वार्ड में प्रसूता महिलाओं को रखा जाता है, वहां के बेड बेहद गंदे और बदहाल हालत में दिखाई दिए। बेड पर लगी नीली गद्दी पर काले धब्बे, गंदगी और फफूंदी जैसे निशान साफ दिखाई दे रहे थे। ऐसा लग रहा था कि इन गद्दों की लंबे समय से सफाई या बदलने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है।
जबकि यही वह जगह है जहां गर्भवती महिलाएं प्रसव से पहले और बाद में कुछ समय के लिए भर्ती रहती हैं। ऐसे में अगर बेड इस तरह गंदे हों तो संक्रमण का खतरा बढ़ना स्वाभाविक है।
संक्रमण का बढ़ सकता है खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव के समय और उसके बाद महिलाओं की प्रतिरोधक क्षमता काफी कमजोर होती है। ऐसे में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है।
अगर अस्पताल के बेड, गद्दे और आसपास का वातावरण साफ न हो तो मरीजों में संक्रमण फैलने की संभावना काफी बढ़ जाती है। खासकर नवजात शिशुओं के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है।
अस्पताल प्रशासन पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार स्वास्थ्य सेवाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, तो फिर अस्पतालों में बुनियादी साफ-सफाई क्यों नहीं दिखाई देती?
क्या अस्पताल प्रशासन को इन गंदे बेड की जानकारी नहीं है?
क्या नियमित सफाई और निरीक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल में अक्सर सफाई व्यवस्था को लेकर शिकायतें मिलती रहती हैं, लेकिन इस पर ठोस कार्रवाई कम ही देखने को मिलती है।
मरीजों और परिजनों की परेशानी
अस्पताल में इलाज कराने आए कई लोगों ने भी नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यहां कई बार सफाई की स्थिति ठीक नहीं रहती। मजबूरी में लोग सरकारी अस्पताल का सहारा लेते हैं क्योंकि निजी अस्पतालों का खर्च हर किसी के बस की बात नहीं है।
एक परिजन ने बताया कि जब कोई महिला प्रसव के लिए आती है तो परिवार के लोग चाहते हैं कि उसे साफ और सुरक्षित माहौल मिले, लेकिन अगर वार्ड की हालत ही ऐसी हो तो चिंता होना स्वाभाविक है।
सरकार के दावे और जमीनी हकीकत
सरकार की ओर से समय-समय पर स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाएं बढ़ाने की बात कही जाती है। नई मशीनें, बेहतर दवाएं और साफ-सफाई पर जोर देने के निर्देश भी दिए जाते हैं।
लेकिन अगर अस्पतालों में इस तरह की स्थिति सामने आती है तो यह साफ संकेत है कि निगरानी व्यवस्था कहीं न कहीं कमजोर है।
जिम्मेदारों को लेना होगा संज्ञान
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए जरूरी है कि अस्पतालों में नियमित निरीक्षण किया जाए और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुस्तफाबाद जरवल की इस स्थिति को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि संबंधित अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेंगे और जल्द ही वार्ड की सफाई, गद्दों के बदलाव और स्वच्छता की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।
जनता की उम्मीद
सरकारी अस्पताल आम लोगों की उम्मीद होते हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग इन्हीं स्वास्थ्य केंद्रों पर निर्भर रहते हैं।
ऐसे में जरूरी है कि यहां की व्यवस्था बेहतर हो, साफ-सफाई बनी रहे और मरीजों को सुरक्षित माहौल मिले।
अब देखना यह है कि इस मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी क्या कदम उठाते हैं और क्या अस्पताल की व्यवस्था में कोई सुधार होता है या नहीं।

