गोंडा। इंसानियत और संवेदनशीलता की एक मिसाल उस समय देखने को मिली, जब लखनऊ से गोंडा अपने मामा के घर राखी लेकर जा रही करीब 10-12 वर्षीय बच्ची के पिता की अचानक तबीयत बिगड़ गई। पिता के सड़क किनारे गिर जाने के बाद बच्ची घबराकर रोने लगी। मौके पर मौजूद लोगों ने बच्ची को अकेला देखकर तुरंत उसकी मदद की और परिवार से संपर्क कराया।
जानकारी के अनुसार, बच्ची अपने पिता के साथ स्प्लेंडर बाइक से लखनऊ से गोंडा के कडरू चौरी चौराहा स्थित अपने मामा के घर राखी लेकर जा रही थी। रात करीब 9:30 बजे वे न्यू स्टार ढाबा, झुकिया के पास पहुंचे। इसी दौरान अचानक बच्ची के पिता की तबीयत बिगड़ गई और वह सड़क किनारे गिर पड़े।
पिता को इस हालत में देखकर बच्ची घबरा गई और रोने लगी। बच्ची को रोता देख बिंदे राव, राहिल, मोहम्मद आरिफ, ऋषि राजपूत और विक्रम शाक्य तुरंत उसकी मदद के लिए आगे आए। उन्होंने बच्ची को ढांढस बंधाया, उसे खाना-पानी कराया और उसके परिजनों से संपर्क करने की कोशिश की।
मदद करने वाले लोगों ने बच्ची की मम्मी, नाना और मामा से फोन पर बात कराई, जिससे बच्ची को भरोसा मिला कि वह सुरक्षित है और उसके परिवार के लोग उसके पास पहुंच रहे हैं।
करीब रात 11:30 बजे बच्ची के मामा मौके पर पहुंचे। उन्होंने बच्ची को सुरक्षित पाया और मदद करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद किया।
बच्ची ने बताई शराब पिलाए जाने की बात
बातचीत के दौरान बच्ची ने बताया कि रास्ते में उसके पिता के कुछ दोस्तों ने उन्हें शराब पिलाई थी। हालांकि, इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। पिता की अचानक तबीयत बिगड़ने की वजह को लेकर चिकित्सकीय जानकारी भी सामने नहीं आई है।
घटना ने एक गंभीर सामाजिक सवाल जरूर खड़ा किया है—दोस्ती के नाम पर किसी व्यक्ति को शराब या कोई अन्य नशीला पदार्थ पिलाकर उसे सड़क पर वाहन चलाने के लिए छोड़ देना कितना खतरनाक हो सकता है।
अगर उस समय बच्ची और उसके पिता की मदद के लिए कोई नहीं पहुंचता और रास्ते में कोई बड़ी अनहोनी हो जाती, तो इसका असर सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं बल्कि पूरे परिवार पर पड़ सकता था।
दोस्ती वह, जो जिंदगी बचाए
इस घटना से एक महत्वपूर्ण संदेश सामने आता है कि दोस्ती के नाम पर किसी को ऐसी चीज के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए, जिससे उसकी या दूसरों की जिंदगी खतरे में पड़ जाए। खासकर वाहन चलाने से पहले शराब का सेवन बेहद गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
दोस्ती वह है जो जिंदगी बचाए, खतरे में न डाले।
इस पूरी घटना में बिंदे राव, राहिल, मोहम्मद आरिफ, ऋषि राजपूत और विक्रम शाक्य द्वारा समय पर दिखाई गई संवेदनशीलता और मदद ने यह साबित किया कि मुश्किल वक्त में किसी अनजान व्यक्ति के लिए बढ़ाया गया मदद का एक हाथ भी किसी परिवार के लिए बड़ी राहत बन सकता है।
The Awadh Voice भी लोगों से अपील करता है कि सड़क पर यदि कोई व्यक्ति संकट में दिखाई दे और मदद की जरूरत हो, तो सुरक्षित तरीके से उसकी सहायता जरूर करें। एक छोटी-सी मदद किसी की जिंदगी और उसके परिवार की खुशियां बचा सकती है।
The Awadh Voice — आपकी बात, सच्चाई के साथ।
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