कुछ प्रेम जिद्दी होते हैं

कुछ प्रेम
चिताओं से भी अधिक ज़िद्दी होते हैं।

शरीर राख हो जाता है,
नाम मिट जाता है,
चेहरा तस्वीरों में कैद रह जाता है…

मगर किसी की याद
मन के भीतर ऐसी जगह बना लेती है,
जहाँ मृत्यु भी पहुँच नहीं पाती।

मणिकर्णिका की आग
शरीर को जला सकती है,
मगर उस प्रेम को नहीं
जो किसी की साँसों में
अपना घर बना चुका हो।

गंगा बहुत कुछ बहा ले जाती है—
रिश्ते, वक़्त, दर्द,
यहाँ तक कि अधूरे किस्से भी…

मगर कुछ यादें
उसकी लहरों से भी ज़िद्दी होती हैं,
वे बहती नहीं,
किनारों पर ठहर जाती हैं।

शायद इसलिए
काशी में मृत्यु भी
प्रेम के आगे हार जाती है…

क्योंकि कुछ प्रेम
जीवन के साथ ख़त्म नहीं होते,
वे मृत्यु के बाद
किसी की ख़ामोशी में
और गहरे उतर जाते हैं।

और फिर…

जब कोई पूछता है—
“क्या वह अब भी तुम्हारे साथ है?”

हम मुस्कुरा देते हैं…

क्योंकि कुछ लोग
साथ नहीं होते,
मगर हर पल मौजूद होते हैं।

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